परिचय
परिचय
आजकल उसका किसी भी काम में मन नहीं लगता। निराश उसकी जीवन को अपनी बस में कर चुकी है। अक्सर जो मुस्कुरा देता था, अब पूरा उदास हो चूका है। अब इधर उधर नहीं भटकता खुशियाँ बाँटते हुए। आखिरकार उसको वो सबका सामना करना पड़ा, जो उसके माँ, बाप उसे बोलते थे।
लेकिन वो अब भी अपने आप से ये सवाल अक्सर पूछता रहता हे, "क्या उसका अरमान की कोई कीमत नहीं है ? क्यों हमें बड़ों के आगे अपना सपनों का गला घोंटना पड़ता है।
वो अब इन सबसे थक चुका था। खुद की ये चुप्पी अब उसे काटने को दौड़ती थी। अब जैसे अपना वजूद को ढूंढने लगा था। अब ये जीवन का कोई फायदा नहीं, यूँ बेमतलब वो कब तक जिए ?
ये सोच वो चला ऐसी राह पर जो उसे कभी गवारा था। लेकिन तब उसकी अंतरात्मा जाग उठी, बस एक ही सवाल उससे पूछ लिया, "क्या अपनी मर्जी से आये थे जो जाओगे, और फिर क्या अपने सपनों के साथ न्याय कर पाओगे ?" तुम तो चल दोगे अंधेरी दुनिया में, लेकिन इस दुनिया में तुम्हारे सपनों के रोना क्या तुम्हें शांति देगी ?"
"अब नादानी छोड़ो और मन में टूटी उम्मीदों को जोड़ो", अब हर तरफ उसकी साँसों की आवाज गूंज रही थी और वो संकल्प कर रहा था, बनायेगा अपना एक नया परिचय।
