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लू लू बना जासूस

लू लू बना जासूस

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लू लू का मन उछल-उछल जा रहा है। गेंद की तरह। गाँव जो जाना है। नानी-नानू के पास। इतना खुश है कि `होमवर्क’ भी फटाफट कर रहा है। बिना ऊं-आं किए। हर बात भी मान लेता है। माने भी कैसे नहीं। जरा सी न करने पर भी मम्मी झट जो सुना देती है- ‘देख लू लू, नहीं मानेगा तो नानी-नानू के पास जाना कैंसिल। इसी बात से तो लू लू को डर लगता है। अगर मम्मी ने सचमुच ‘कैंसिल’ कर दिया तो?

लू लू की एक ‘सीक्रेट’ भी तो है। उसे बस टी लू ही जानता है। लू लू ने टी लू को ही जो बताई थी। ‘सीक्रेट’ यह है कि लू लू को अपने नानी-नानू बहुत-बहुत अच्छे लगते हैं। उनकी याद ही से लू लू के मुँह में पानी आ जाता है। जब लू लू ने टी लू को यह ‘सीक्रेट’ बतायी तो टी लू का तो सिर ही चकरा गया था। आँखें फाड़कर पूछा- “आदमियों को याद करने से मुँह में पानी कैसे आ जाता है लू लू?" मैं भी अपनी अच्छी-अच्छी मौसी को याद करता हूं, पर मेरे मुँह में तो पानी नहीं आता!" टीलू की बात सुनकर लू लू को हँसी आ जाती है। बोला, "बुद्धु, नानी-नानू की याद करता हूं तो मुझे नानी के मीठू की याद आ जाती है। नानी मेरे लिए बहुत ही स्वादिष्ट मीठू बनाती है। वैसा मीठू कोई नहीं बना सकता। बस उसी की याद आ जाती है और मेरे मुँह में पानी आ जाता है।" सुनकर, टी लू की भी हँसी छूट जाती है।

गाँव पहुंचते ही नानी-नानू ने लू लू को बाहों में भर लिया। मम्मी से बाद में बात की। लू लू को सोचना पड़ा- ‘मम्मी तो नानी-नानू की बेटी है, पर वे सबसे पहले उसे प्यार करते हैं। इसका मतलब वे मम्मी से भी ज्यादा उसे प्यार करते हैं।’ यह सोचकर उसे बड़ा मज़ा आ रहा था। उसे लगा  मम्मी को उसने हरा दिया हो। पर तभी लू लू को नानी के हाथों बने अपने मीठू की याद आई। याद आते ही उसका मुंह तो पानी से भर गया। सच तो यह है कि लार भी टपकने लगी। बड़ी मुश्किल से संभलते हुए नानी से पूछा- ‘नानी! नानी, मेरा मीठू तो बनाया है न? मुझे जल्दी  से चाहिए।’ नानी ने उसके गाल को बहुत ही प्यार से चूमते हुए कहा- ‘ढेर सारा बनाया है लू लू! अपने लू लू के लिए मीठू नहीं बनाऊंगी तो किसके लिए बनाऊंगी? जाते समय कुछ अपने साथ भी ले जाना।’ लू लू को नानी बहुत ही अच्छी लगी, पर तभी न जाने क्यों उसने यह भी सोचा कि जब किसी को प्यार आता है तो वह गाल क्यों चूमता है। लेकिन तभी मीठू की याद फिर कहीं से तैरती हुई चली आई। लू लू को लगा कि उसके भीतर छिपा मन मंद-मद मुस्कुरा रहा था।

सब अंदर आकर बैठ गए। नानी अंदर चली गई। रसोई में। और वहीं से आवाज दी- ‘लू लू, लू लू बेटे, ज़रा मेरे पास आना तो! लू लू भागता हुआ अंदर गया। देखा नानी ने ऊपर के खाने से एक कनस्तर उतार कर नीचे रख दिया था। कनस्तर पर ताला लगा हुआ था। नानी ने ताला खोला और ढक्कन ऊपर कर दिया। लू लू की तो बाँछे खिल गई। बहुत ही अच्छी, जानी-पहचानी खुशबू जो लू लू की नाक में घुस गई थी। लू लू को लगा खुशबू जैसे नाच रही थी और उसे गुदगुदी भी करती जा रही थी। लू लू को हँसी आने को हो गई। पर यह क्या! लू लू ने महसूस किया कि हंसी उसकी आँखों से फूटने लगी थी। लू लू को फिर सोचना पड़ा- ‘जब हम खुश होते हैं तो हमारी आँखें भी क्यों खुश हो जाती हैं?’

 ‘नानी, आपने तो सचमुच ढेर सारे मिठू बनाएं हैं’, -लू लू ने मिठूओं की ओर देखते हुए कहा। लू लू को इतना खुश देखकर नानी को कितनी खुशी हुई, यह तो नानी ही बता सकती है। नानी ने लू लू पर प्यार की मानो बारिश करते हुए कहा- ‘ये सारे मीठू बस तुम्हारे लिए है लू लू। खूब खाओ। लेकिन इतने नहीं कि पेट ही चल जाए।’ ‘पेट ही चल जाए! नानी क्या पेट भी चलता है?" -लू लू ने अचरज दिखाते हुए नानी से पूछा। ‘अरे पगले, पेट चलने का मतलब पेट खराब होना होता है’ -नानी ने बताया। ‘अच्छा!’-लू लू ने अनमने भाव से कहा। असल में तो लू लू का पूरा ध्यान मीठूओं पर ही था। मन किया कि बस खाना शुरु कर दे। और उसने खाना भी शुरु कर दिया।

तभी बाहर से नानू की आवाज आई- ‘अरे नानी-धेवता अंदर बैठे क्या खिचड़ी पका रहे हो। इतनी देर हो गयी है। अब बाहर भी आ जाओ। हम भी तो लू लू से शहर की बातें सुन लें।’ नानू की आवाज सुनकर नानी ने कहा- ‘लू लू, देर तो सचमुच में बहुत हो गई है। चलो बाहर चलते हैं।’ बाहर चलने को हुए तो नानी ने अचानक लू लू को रोकते हुए बहुत धीमे स्वर में कहा- ‘लू लू मेरी एक बात मानेगा? वह ...तुम क्या कहते हो..’सीक्रेट’ है। किसी को भी पता नहीं चले।’ ‘हाँ नानी ‘प्रोमिज’, पर ‘सीक्रेट’ है क्या?’ -लू लू ने भी अपनी आवाज धीमी करके  पूछा। ‘तो सुन, तुझे मेरा जासूस बनना होगा।’ -नानी ने कहा। ‘जासूस’! लू लू ने आश्चर्य से नानी की ओर देखते हुए कहा। ‘हाँ लू लू जासूस। लेकिन पहले बाहर चलो। थोड़ी देर में बाताऊंगी।’ -नानी ने कहा।

दोनों बाहर आ गए। सब एक-दूसरे से बातें करने लगे। लेकिन लू लू का मन तो ‘सीक्रेट’ पर ही अटका हुआ था। बातों में उसे जरा भी मज़ा नहीं आ रहा था। उसे बहुत ही अजीब-सा महसूस हो रहा था। वह बार-बार नानी की ओर देखता और बुदबुदाता- ‘सीक्रेट नानी, सीक्रेट। आखिर नानी ने रास्ता निकाला। वह उसे एक बहाने से फिर अंदर ले गई।

अंदर पहुंचते ही लू लू के पेट से तो मानों ‘सीक्रेट’ जानने की इच्छा, खरगोश की तरह फुदक कर बाहर आ गई। अब वह एक पल भी इंतजार नहीं कर सकता था। नानी ने कहा- ‘लू लू जब तक तू यहां है तुझे अपने नानू की जासूसी करनी होगी।’ ‘नानू की?’ -चौंकते हुए लू लू ने नानी से कहा। ‘हाँ लू लू नानू की।’-नानी ने कहा। ‘ध्यान से सुन! मुझे लगता है कि तेरे नानू चोरी-चोरी मीठू खा जाते है। वैद्य ने उन्हें मीठू खाने से मना किया है। उन्हें एक बीमारी जो लग गई है। उसका नाम ‘डायबिटीज’ है। तुझे ध्यान रखना होगा। छिप-छिप कर। जासूसों की तरह। जरा भी पता चले तो झट से मुझे बता देना। मैं उनसे मीठू छीन लूंगी।’ ‘पर नानी, मीठू तो बहुत अच्छी चीज़ होती है। कितनी स्वाद भी।’ ‘हाँ लू लू, लेकिन यदि डॉक्टर मना करे तो नहीं खानी चाहिए। कोई भी चीज़ हो। नहीं तो बहुत ज्यादा बीमार होना पड़ेगा। कष्ट भी बहुत बढ़ जाएगा।’ ‘सच्ची नानी? मुझे जब खाँसी और जुकाम होता है तो मम्मी आइसक्रीम भी खाने से मना करती है और बर्फ डालकर शरबत पीने से भी। पर मैं तो बहुत लड़ता हूं। मुझे दोनों ही चीज़े पसन्द हैं न। कभी-कभी तो चोरी-चोरी भी बर्फ निकाल कर पानी में डाल लेता हूं। मम्मी को पता भी नहीं चलता।’ ‘यह तो ठीक बात नहीं हुई न लू लू। इससे तो बीमारी और बढ़ सकती है। जुकाम और खाँसी बढ़ सकती है। और डॉक्टर के पास जाना पड़ सकता है।’ ‘हाँ नानी, यह बात तो ठीक कही। मेरी तो साँस ही घुटने लगी थी। गला भी बहुत दर्द करने लगा था। छाती भी। मम्मी डॉक्टर के पास ले कर गयी थी। पर नानी जो चीज़ खाने को मना की जाती है उसको खाने का मन क्यों करता है?’ ‘इसलिए लू लू कि हमें वह चीज़ अच्छी लगती है और उसके खाने की हमें आदत हो जाती है। तभी तो उसे आसानी से छोड़ना मुश्किल हो जाता है। जबरदस्ती करनी पड़ती है। बीमार के फायदे के लिए।’ ‘जैसे नानू के फायदे के लिए नानी?’ ‘हाँ लू लू! तो बनेगा न जासूस?’

‘हाँ नानी, पर एक शर्त है!’ ‘शर्त? कैसी शर्त लू लू?’ ‘यही कि जब आप भी कुछ मना करने पर खाएंगी तो मैं नानू का जासूस बन जाऊंगा।’

‘हट बदमाश!’ -नानी ने हँसते हुए कहा। लू लू को तो वैसे ही हँसी आयी रहती है। सो वह भी हँस पड़ा।

हँसी रुकी तो नानी ने प्यार से कहा- ‘लू लू, तू तो बड़ा समझदार है।’ ‘हाँ नानी, आप भी बहुत समझदार हो। पर जानती भी हो क्यों?’ ‘क्यों लू लू?’ -नानी ने आँखें फाड़ कर पूछा। लू लू ने कहा- “जरा सोचो, आप नानी किसकी हैं?" नानी ने खींच कर लू लू को गले लगा लिया और प्यार से उसके गाल चूम लिए।

तेरे नानू चोरी-चोरी मीठू खा जाते है। वैद्य ने उन्हें मीठू खाने से मना किया है।

 

 

 

 


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