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परेशां है खुद अच्छी कविता इशारों कमाल भान उड़ता शहर बातें भूख पूँछ दुश्मन अजीबोगरीब बुजुर्ग आज़ाद तनहाइयों बेचैन दोस्त घायल पड़ाव

Hindi परेशां Poems