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ब्रम्हरुप उदास तुम ज्ञानी हृदय अंधेरे प्रेम धूप सत्य प्रीत hindikavita इंसानी स्वरूप खुश कर्कश हो प्रकृति वाणी भ्रूणहत्या व्यवहार

Hindi कुरूप Poems