STORYMIRROR

Amruta Gadekar

Abstract

3  

Amruta Gadekar

Abstract

सवाल

सवाल

1 min
146

कभी खुशनुमा ख्याल हूं!

कभी उलझा सा सवाल हूं! 

कभी शाम की कड़क चाय

कभी मोहल्ले की बवाल हूं! 

गुजरा हूआ साल हूं ! 

में बहकी बहकी सी चाल हूं! 

कभी काम से बेहाल हूं! 

कभी दुआओ से निहाल हूं!

में जज्बा बेमिसाल हूं! 

कला से मालामाल हूं! 

में खुशनुमा ख्याल 

एक उल्झा सा सवाल हूं!!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Amruta Gadekar

सवाल

सवाल

1 min पढ़ें

रोशनी

रोशनी

1 min पढ़ें

एहसास

एहसास

1 min पढ़ें

कोट्स

कोट्स

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Abstract