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Sumit Jain

Abstract

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Sumit Jain

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सफर

सफर

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ज़िन्दगी का सफर ही कुछ ऐसा है यारो,

रुकना नहीं हमें बस चलते जाना है,

हो सके तो भुला के सब जी लो ज़िन्दगी,

मंजिल यहां नहीं अभी हमें बहुत दूर जाना है,


आगे बढ़े चल अपनी मंजिलों को छूने को,

ज़िन्दगी एक सफर है बस चलते जाना है,

मुसीबत भले आए रास्ते में तेरे कभी,

तू जीत सकता है बस यही विश्वास दिखाना है....


कोई रोकेगा तुझे तो कोई हराएगा तुझे कभी,

तू जब भी हारेगा तो तेरी हँसी उड़ाएगा कभी,

तू रखना कमी बताने वाले को अपने ही पास में,

वहीं तुझे एक दिन दुनिया में जीताएगा कभी....


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