समाज
समाज
तुम आगे बढ़ना सीखो,
तुम्हें पीछे खींचने के लिए समाज है ना।
तुम सपने देखना सीखो,
उसे तोड़ने की कोशिश में समाज है ना।
तुम खुद को प्रेरित करो,
तुम्हें हतोत्साहित करने के लिए समाज है ना।
तुम ऊंचाई पर चढ़ना सीखो,
तुम्हें नीचे गिराने के लिए समाज है ना।
तुम हंसना सीखो,
तुम्हें रुलाने के लिए समाज है ना।
तुम अच्छाई करना सीखो,
तुम्हें बड़ा करने के लिए लोग है ना।
तुम पुण्य करना सीखो,
तुम्हें पापी कहने के लिए लोग हैं ना।
तुम प्रेम करना सीखो,
घृणा करने के लिए समाज है ना।
तुम मधुर वाणी बोलना,
सीखो कटु वचन बोलने के लिए समाज है ना।
तुम दिल से लोगों के बारे में अच्छा सोचो,
बुरा सोचने के लिए समाज है ना।
तुम क्षमा करना सीखो,
दंड देने के लिए समाज हैं ना।
तुम सूरज की तरह चमकना सीखोन,
तुमसे जलने के लिए लोग समाज है ना।
तुम अपनी पहचान बनाओ न,
भीड़ में जाने के लिए समाज है ना।
