STORYMIRROR

Ritika Rashmi

Inspirational

4  

Ritika Rashmi

Inspirational

सहारा

सहारा

1 min
290

दूसरों का सहारा बनो। 

बनो सुबह की नरम धूप तुम, 

कांटो में लिपटी कोमल 

मासूम कलियों को खिलाते रहो। 

बन शबनमी कतरा 

हरी दूब पर तुम, 

मोतियों सी जगमगाते रहो।

दूसरों का सहारा बनो। ।

क्षीण हीं सही मगर..

बन कर लौ एक छोटी सी दीया की, 

गहन तिमिर से लड़ने की चेष्टा सतत् करते रहो। 

दूसरों का सहारा बनो। ।

मुर्गे की बांग बन सोये जहान में अलख़ जगाते रहो। 

हृदय में अंकुरित कर

 बीज़ स्नेह का,

सदा संसार को पाठ प्रेम का पढ़ाते रहो। 

दूसरों का सहारा बनो। ।

हौसला ये तेरा कभी कम ना होने पाए,

एकनिष्ठ भाव लिए तुम 

दिवा रैन अनवरत् चलते रहो। 

दूसरों का सहारा बनो। ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Ritika Rashmi

सहारा

सहारा

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Inspirational