Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF
Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF

रास्ते चलते गए मैं बढ़ता गया

रास्ते चलते गए मैं बढ़ता गया

1 min 313 1 min 313

रास्ते चलते गए मैं बढ़ता गया

समय के साथ-साथ मैं भी बदलता गया

आई चुनौतियाँ हज़ार सबसे लड़ता गया

दुख के बादल छाये मगर मैं हँसता गया

रास्ते चलते गए मैं बढ़ता गया


क्या खोया क्या पाया सब का हिसाब

रखता गया

भूल कर अपना बचपन जिम्मेदारियों

में फंसता गया

लगा दी जिंदगी जिसे कमाने में उस पल

का इंतजार करता गया

कभी अपनों के साथ कभी अपनों के

बगैर मोमबत्ती की तरह पिघलता गया

रास्ते चलते गए में बढ़ता गया


हिम्मत टूटी लाखों बार गिरकर भी

संभलता गया

न सपने संजोए सुख के न दुखों से मैं

डरता गया

खो कर खुद को एक नई पहचान का

सफर तय करता गया

ना रुका ना थमा ना बैठा बस मंज़िल

की ओर बढ़ता गया

रास्ते चलते गए मैं बढ़ता गया..


Rate this content
Log in

More hindi poem from Anu Jain

Similar hindi poem from Inspirational