STORYMIRROR

Tanisha Runiwal

Inspirational Others

4  

Tanisha Runiwal

Inspirational Others

पुराने पन्ने

पुराने पन्ने

1 min
253

वॉट्सएप , फेसबुक, इंस्टाग्राम पे सारा जहाँ है

पर सच बताना यार

वो कागज की स्याही याद करते हो कि नही,

सच है कि उंगलियों पे सारा जहाँ है

लेकिन सच सच बताना यार

इसमें हाथ से लिखे खत की आत्मा कहाँ है...


भूल गए वो दिन

जब चिट्ठियों में बसी गंध, महीनों तक नाक पे बसी रहती थी,

और डाकिये को देख चेहरे पे हँसी रहती थी...


 जवानी में खत न लिखे होते, तो करने को कुछ था ही नहीं,

और मीर से लेकर गालिब तक की शायरी हर खत में बही...


अरे घर से भागना हो तो खत छोड़ा जाता था

और जिस किताब में खत हो उसका पन्ना मोड़ा जाता था...

 चिट्ठियाँ क्या थी?

बग़ावत, मोहब्बत, प्यार, स्नेह, निमंत्रण और माफी था

माँ की चिट्टी आयी है 

रुलाने के लिए एक वाक्य काफी था...


इन दिनों किसी संदूक में कोई फटा खत मिल जाए तो प्रेम से देखते हो कि नही

सच बताना यार 

याद करते हो कि नही!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational