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Dr.sunil Parit

Inspirational

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Dr.sunil Parit

Inspirational

ओ मेरे कान्हा...

ओ मेरे कान्हा...

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ओ मेरे कान्हा अब मेरे इस जीवन में आ जाना।

ओ मेरे कान्हा मेरे इन नैनों को दर्शन दे जाना।।


कब से व्याकुल है नयन मेरे

कब से पुकार रहा है मन मेरा।

कब से भटक रहा हूं तेरे लिए

हर पल गा रहा हूं गुणगान तेरा।।

ओ मेरे कान्हा ....


कब से तेरी प्यास लगी हुई है

अमृत जल से प्यास बुझा जाना।

दिन-रात सुमिरन तेरा करू

आकर जीवन पावन कर जाना।।

ओ मेरे कान्हा ....


तड़प रहा हूं तेरे लिए यहां

हाथ पकड़ कर मुझे उठा लेना।

संसार की कोई खुशी न चाहूं तेरे सिवा

आकर इस जीवन में मुक्ति दे जाना।।

ओ मेरे कान्हा ....


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