STORYMIRROR

Shraiyansh Daagar

Romance

3  

Shraiyansh Daagar

Romance

नींदें

नींदें

1 min
272

मुसलसल किस्सों में, 

हिस्सेदारियां आम हुई!

दलीलें उठ कर जाने की,

सारेआम नाकाम हुई

गुफ्तगू रात से शुरू जो,

सुबह अंजाम हुई

खुमार ही टूटते शाम हुईं

नींदें बदनाम हुई!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance