नीले दुप्पटे वाली लड़की
नीले दुप्पटे वाली लड़की
वो नीले दुप्पटे वाली लड़की,
वह आत्मसम्मान से भरी लड़की।
चर्चे है आज उसके सारे मोहल्ले में ,
पति का घर छोड़ आयी है।
निर्लाज बेहया,
कैसे वह अपने बाबुल के आंगन लौट आई है।
किसको पता,
बाबुल ने भी उसको ठुकराया था।
लौट जाने को समझाया था।
कहां जाती लेके एक और नन्ही जान ,
चुनना था एक ,समाज या सम्मान,
जो उसके शरीर पे चिन्ह् थे
उसके कल का जो प्रतिबिंब थे
अब उसको भुलाना होगा ।
एक जंग जीती है अभी
एक कदम और बढ़ाना होगा ।
घर की मर्द भी वह है ,
हर दर्द का मर्ज भी वह है ।
करती सारे काम काज़,
नहीं वह किसी की मोहताज।
नन्ही जान की परवरिश की
ममता की बारिश की ।
घर बना भी लिया सम्हाल भी।
बाबुल को भी संग लिया
समाज को भी ढाल लिया।
अब वह नीले कार वाली लड़की ,
आज भी मोहले में उसके चर्चे हैं ,
सबको ऐसी बेटी दे
बस यही कहते हैं।
