STORYMIRROR

Payal Khatik

Inspirational

4  

Payal Khatik

Inspirational

"नदी की अविरल धारा "

"नदी की अविरल धारा "

1 min
427

मैं नदी की अविरल धारा हूं !

तुम जितने पत्थर फैंकोगे

मैं सारे अपनी तलीं में बिठा दूंगी।।


मैं नदी की अविरल धारा हूं !

मेरे राहों की चट्टानों को कांट छांट

उपजाऊ मैदान बना दूंगी।।


मैं नदी की अविरल धारा हूं ! 

बंजर भूमि सींच सींच

लहलहाते खेत बना दूंगी।।


मैं नदी की अविरल धारा हूं ! 

मैं कल कल बहती हुई दुग्ध धारा से

अमृत का पान करा दूंगी।। 


मैं नदी की अविरल धारा हूं ! 

पवित्रता के आंचल से तुझे

पाप मुक्त करा दूंगी।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational