Prabhjot Kaur
Abstract
आजादी के साल हुए कई
पर क्या हमने पाया है
सोचा था क्या होगा लेकिन
सामने पर कया आया है
रामराज्य सा देश हो अपना
बापू का था सपना
चाचा बोले आगे बढ़ कर
कर ले सब को अपना
आजादी फिर छिने न अपनी।
मेरा सपने का...
इक तरफा इश्क़ था तो हम मुस्कुरा लेते थे हंँसी में उसकी शामिल होकर गुनगुना लेते थे। इक तरफा इश्क़ था तो हम मुस्कुरा लेते थे हंँसी में उसकी शामिल होकर गुनगुना लेत...
इसका भार भी चिड़िया के परों की तरह ही हल्का होता है इसका भार भी चिड़िया के परों की तरह ही हल्का होता है
हिम्मत कर के अब है उठना, हर्ष उल्लास से स्वागत करना। हिम्मत कर के अब है उठना, हर्ष उल्लास से स्वागत करना।
कभी लफ्जों में उतर आते हैं वो लम्हे कभी लफ्जों में उतर आते हैं वो लम्हे
पुलकित सारे बैठे रहते , अचरज भरी हिलोर से !! पुलकित सारे बैठे रहते , अचरज भरी हिलोर से !!
कौन किसके नंबर पर कॉल करता है, ये तो उस इंसान की प्राथमिकता बताती है। कौन किसके नंबर पर कॉल करता है, ये तो उस इंसान की प्राथमिकता बताती है।
कभी छाती पर चिपका के मुझे सो जाते सारी रात कभी छाती पर चिपका के मुझे सो जाते सारी रात
कब तक यूं पढ़ते जाओगे? आखिर, नौकरी कब पाओगे? कब तक यूं पढ़ते जाओगे? आखिर, नौकरी कब पाओगे?
कब तक काटोगी जिंदगी का सफर तन्हा, कोई साथ होगा तो रास्ता आसान होगा, कब तक काटोगी जिंदगी का सफर तन्हा, कोई साथ होगा तो रास्ता आसान होगा,
दर्द देने वाले तो दर्द देकर चले जाते है भूल जाते है लोग उनको, दर्द देने वाले तो दर्द देकर चले जाते है भूल जाते है लोग उनको,
प्रकृति की छटा निराली है कभी सूरज की लालिमा से सिंदूरी सी दिखती है। प्रकृति की छटा निराली है कभी सूरज की लालिमा से सिंदूरी सी दिखती है।
हे राम गाते रहेंगे तेरे नाम तू मर्यादा पुरुषोत्तम राम कर्म-क्षेत्र हो या गृहस्थाश्र। हे राम गाते रहेंगे तेरे नाम तू मर्यादा पुरुषोत्तम राम कर्म-क्षेत्र हो ...
नए के स्वागत के साथ तुझे विदा कर रहे है, हां! आने वाले का स्वागत हर्षोल्लास से कर रहे नए के स्वागत के साथ तुझे विदा कर रहे है, हां! आने वाले का स्वागत हर्षोल्लास ...
ये मैं न अब मैं नहीं रही अब वो भी तेरे नाम की।। ये मैं न अब मैं नहीं रही अब वो भी तेरे नाम की।।
दशा बदलती , भाव बदलते , समय बदल सा जाता है !! दशा बदलती , भाव बदलते , समय बदल सा जाता है !!
रूकावटें रोक न पायेंगी, गति का नियम ये कहता है। रूकावटें रोक न पायेंगी, गति का नियम ये कहता है।
जीवन से संघर्ष करते निर्धन गरीब लाचार लोग जीवन से संघर्ष करते निर्धन गरीब लाचार लोग
आज जब मेरी सज़ा लिखी जा रही है, क्या मुझसे भी कोई पूछने आयेगा? आज जब मेरी सज़ा लिखी जा रही है, क्या मुझसे भी कोई पूछने आयेगा?
हरि के रंग में रंग जाने को हर मन है अब तो तैयार हरि के रंग में रंग जाने को हर मन है अब तो तैयार
दृढ़ संकल्प की वाणी को तो सबने ठानी, मिल जाये सफलता और ना हों कोई हानि। दृढ़ संकल्प की वाणी को तो सबने ठानी, मिल जाये सफलता और ना हों कोई हानि।