मेरा देश महान
मेरा देश महान
भारत भूमि वीरों की जननी, अनुपम छवियों वाली है,
मतवाली प्रजा देशप्रेम में,सब न्यौछावर करने वाली है।
जय जवान जय किसान का,नारा यहां पर गूंजता है,
मेरे देश की प्यारी माटी को,यह सारा चमन चूमता है ।।
सरहद पर खड़े योद्धाओं ने, दुश्मन को ललकारा है,
स्वदेश रक्षा की खातिर, हमने अपना सीना ताना है।
जान भले चली जाए, तिरंगे की शान नहीं जाने पाए,
अलबेलों की टोली संग, अपना पूरा वतन झूमता है।।
इतनी सारी भाषाओं को, मेरे भारत ने खूब संवारा है,
विभिन्न संस्कृतियों का मेल, यहां सारे जग से न्यारा है।
उत्तर से दक्षिण तक लेकर,पूरब से पश्चिम तक लेकर,
प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता,हर जन जिसे पूजता है।।
नदियों की कल कल में देखों, मधुर स्वर लहरियां है,
खग कलरव की तान में भी, संगीत सुरम्य बेलिया है।
ऐसी वाणी हम लोगों की, नदियां भी हमारी माता हैं,
पत्थर में भी देखें ईश्वर, पूजा कर हर भक्त झूमता है।।
विश्व गुरु की पहचान देश ने, यूं ही नहीं बना ली है,
योगी मुनियों ने लगा समाधि, इस ब्रह्मांड को जाना है।
स्वामी विवेकानंद की वाणी, मेरे भारत की वाणी है,
योग करने को जगत यह सारा, मेरे देश को ढूंढता है।।
वीर भगत सिंह राजगुरु और आजाद सुभाष से सेनानी,
गार्गी मैत्रेयी अपाला मां सीता, सावित्री की यहां कहानी।
इंदिरा किरण बेदी कल्पना चावला और झांसी की रानी,
धरती से लेकर क्षितिज तलक,इन सबका नाम गूंजता है।।
फिर क्यों धर्म सम्प्रदाय जाति में उलझ गए हैं हम सब,
यह इसका यह उसका, संकीर्ण मानसिकता में जकडे सब।
तोड फोड़ की घटिया नीति से, ऊपर उठकर सोचों अब,
वसुधैव कुटुंबकम् की संस्कृति, पाने को हृदय ढूंढता है।।
