मात्र भाषा हिंदी व मात्र भूमि
मात्र भाषा हिंदी व मात्र भूमि
स्वाभिमान है हमें आज
हम हिंद देश की नारी हैं।
नहीं चाहते हम सुनना ये
अबला हैं बेचारी हैं।।
जान निछावर इस धरती पर
जिस पर हमने जन्म लिया।
गौतम गाँधी औ गुरुनान
शत शत जिसको नमन किया।
आज उसी धरती पर देखो
सारा जग बलिहारी है ।।
हम हिंद देश...
गंगा जमुना सरस्वती बाँहों,
में जिनकी लहराए।
देख हिमालय जैसा प्रहरी
दुश्मन सारे हिल जाए।
देश भक्ति के फूल खिलाती
इसकी मिट्टी न्यारी है।।
हम हिंद देश...
जब तक सूरज चाँद रहेगा
हिंंदी का गुणगान रहेगा।
आँच न आने देंगे तुझ पर
जीवन ये क़ुर्बान रहेगा।
हिंदी और हिंद के आगे
झुकती दुनिया सारी है।।
हम हिंद देश...
