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PRIYANSHI VERMA

Abstract Children Stories

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PRIYANSHI VERMA

Abstract Children Stories

माँ

माँ

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" उनके लिए हर मौसम बहार होता हैं, 

 जिनके हिस्से में माँ का प्यार होता हैं।

एक माँ हि होती हैं जो अपने लिए मन्नत ना मांगकर 

अपने बच्चे के लिए जन्नत मांगती हैं।। "'


"" क्या कहना उस माँ का जिसने 9 महीने, 

अपने पेट में पाला और खून से पोषित किया।

जिंदगी का एहसास होती हैं माँ,

 हर बच्चे की श्वास होती हैं माँ।।" 


" हर रिश्ते में मिलावट देखी,

कच्चे रंगो की सजावट देखी।

पर उसके चेहरे पर कभी थकावट नही देखी, 

 ना ममता में मिलावट देखी ""


 " कभी रूठ जाऊ तो, मनाती हैं ,

 जिंदगी से थक जाऊ तो, लड़ना सिखाती हैं।

हार जाऊ तो, फिरसे जीतना सिखाती हैं

एक माँ ही होती हैं जो,

बिना किसी स्वार्थ के अपनेबच्चे की खुशी में मुस्काती है।


 "" उसके आँचल में जन्नत सी महसूस होती हैं।

" एक माँ हि होती हैं जो जिंदगी में रंग भरती हैं,

पर उसका साया हट जाये तो जिंदगी बेरंग हो जाति हैं।"


 " पिता का साया हट जाये तो माँ ढाल बन कर सम्हाल लेती हैं, 

और खुद का गम भुला कर अपनी संतान के लिए जीती हैं ।।

पर माँ का साया छिन जाये तो जिंदगी ही वीरान हो जाती है। 

 

" उनसे पूछो माँ की अहमियत जिनके पास

रोने के लिए गोद नही होती और

ममता के लिए माँ नही होती।""


"क्या लिखू उस माँ के लिए जो

ईश्वर की वो नायाब रचना है,

 जिसकी मै संरचना हुँ "

  " कितना भी लिखू उस माँ के लिए कम हैं, 

सच तो ये हैं कि माँ हैं तो हम हैं। " 


" हज़ारों गम हो पर,

अपने बच्चों के लिए मुस्कुराती हैं।

माँ ही होती हैं जो चट्टान से भी भिड़ जाती है।


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