कम में गुजारा करना सीखो
कम में गुजारा करना सीखो
जितनी तेरी चादर है
तू उतने पाँव पसार बंदे
जो दिया ख़ुशी से रब ने
तू उसका शुक्र मना बंदे
ना देख तू हरदम ऊंचो को
कभी निगाह तो नीची कर बंदे
जो दिया खुदा ने है तुझको
उसमें ख़ुशी से निबाह बंदे
यहाँ ऐसे भी इंसा है कि
दो जून की रोटी मिलती नहीं
न जाने कितने लोग हैं जो
रातों को भूखे सोते हैं
उन मासूमों के चेहरे पर कभी
पल भर की हँसी भी खिलती नहीं
झोली उनकी भर कर के तू
नई सुबह का कर आगाज बंदे
ये वक्त है ऐसा आया कि
जनजन में हाहाकार उठा
बनकर तू सहारा असहायों का
एक आत्मदीप जला बंदे
अपने हिस्से का कुछ हिस्सा
किसी भूखे को देकर के तू
बदले में दुआएं कर हासिल
कर नेकी तू पुण्य कमा बंदे
उतना ही ले थाली में
कि व्यर्थ ना जाए नाली में
इस बात को ध्यान में रखकर के
एक इंसान का फर्ज निभा बंदे
आज देश की प्रथम माँग है ये
कि कम में गुजारा कर बंदे
कम में गुजारा करके तू
अब मानवधर्म निभा बंदे
कम में गुजारा करके तू
अब मानव धर्म निभा बंदे।
