ख़्वाब
ख़्वाब
खोया हूं उन ख्वाबों में,
जिन ख्वाबों में मेरी मंज़िल है
भटका हूं उन राहों में,
जिन राहों में ना मुकम्मल है।
मेरे गले की प्यास गीत है ,
मेरी मंज़िल संगीत है
खुद को स्वरों में खो देना,
मेरा अनोखा गीत है।
वो राह बहुत कठिन है,
पर मंज़िल हसीन है
खो जाता हूं उन ख्वाबों में,
क्योंकि वह बेहद रंगीन
