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Mani Ram

Inspirational

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Mani Ram

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"जो बोया है सो काटेगा"

"जो बोया है सो काटेगा"

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जो बोया है सो काटेगा

अंधा मानव कब जागेगा।

तू अंधभक्त कब मानेगा

यह कठिन दौर भी बीतेगा

जो जीता है वह हारेगा।


जो हारा है वह जीतेगा

पाखंडवाद सब टूटेगा।

परिवर्तन तो है प्रकृति नियम

तू बचके कहां से भागेगा।


एक लघु विषाणु ने हरा दिया

संकेतों में सब जता दिया।

कथनी करनी में फर्क न कर

ना नर्क यहीं पर भोगेगा।


परिणाम बहुत घातक होगा

जब मानव युद्ध विनाशक होगा

तू वचन निभाना भूल गया

जीवन पथ कैसे काटेगा।


इतिहास के पन्ने कहते हैं

परिवर्तन होते रहते हैं।

जो शूरवीर कब सहते हैं।


तू पेड़ लगाया कंटक का

तो आम कहां से खाएगा।

तू देख गुलाब को कांटों से

उसका जीवन भी खिलता है

रितु सदा एक ही रहती ना

सूरज निकला तो डूबेगा।


जो आया है सो जाएगा

तू रत्ती भर ना पाएगा।

किस पर तू गर्व करें मूरख

मल हाथ सदा पछतायेगा।


गर निर्धन श्रमिक सताएगा

अभिमान तेरा मिट जाएगा

तू मिट्टी में मिल जाएगा।


तू खड़ग धार पर चलता जा

कलयुग में सतयुग आएगा।

तू राम रहीम के फेरे में

तू धर्म अधर्म के डेरे में

भव चकिया में पिस जाएगा।


धन धरती यहीं रह जाएगी

संग फूटी कौड़ी ना जाएगी।

ना राजा रंक है कोई यहां

फल कर्मों का सब भोग रहा।


क्यों मन मंदिर में मानस तू

विष बना बना के घोल रहा।

जो तरुवर फल से लद जाते

वह सदा विनम्र हो झुक जाते।


जो जलद भूमि तक नियराए

वह ही तो अमृत बरसेगा।

नर मनीराम तू चेत अभी

एक सूरज नया उदय होगा।


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