STORYMIRROR

Vivek Singh

Inspirational

3  

Vivek Singh

Inspirational

हमारे रक्षक

हमारे रक्षक

1 min
200

वो अकेला है फिर भी सबके साथ है

वो दूर है फिर भी हमारे साथ है

हम खुश रहे इसलिए वो सीमा पर तैनात है

वो अकेला है फिर भी सबके साथ है

वो हैै सरहद पर उसे नहीं पता क्या दिन क्या रात है

वो लड़ रहा हमारे लिए जरूर कोई बात है

वो होगा अमर एक दिन उसके दिल में ये आस है

वो अकेला है फिर भी सबके साथ है

वो शहीद हुआ हमारे लिए खास बात है

हम भूल जाते हैं ऐसे वीरो को ये बड़ी शर्म की बात हैै

वो अकेला है फिर भी सबके साथ है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Vivek Singh

Similar hindi poem from Inspirational