चेतना प्रकाश चितेरी , प्रयागराज
Inspirational
मेरा घर छोटा–सा ही पर,
मेरे घर में रहने वालों का दिल
बहुत ही बड़ा है।
मैं महंगी वस्तुओं से नहीं,
मैं बेला, गुलाब, गुड़हल, चंपा,
चमेली फूलों से घर को सजा कर रखती हूं।
बचपन की बारीश...
लाखों में एक ...
बहे जब जब पुर...
कामना
माँ
चला परिंदा घर...
मेरी कहानी के...
कौशल्या - दशर...
जन - जन के रा...
हिम्मत नहीं हारना रास्ता चाहे कितना भी कठिन हो l हिम्मत नहीं हारना रास्ता चाहे कितना भी कठिन हो l
जो न दे रहे आज तुम्हारा साथ पछताएंगे ख़ुद एक दिन जो न दे रहे आज तुम्हारा साथ पछताएंगे ख़ुद एक दिन
लाली चुनरिया ओढ़ के गोरिया निरखे पियवा के ओरिया लाली चुनरिया ओढ़ के गोरिया निरखे पियवा के ओरिया
जिन्दगी का कोई किस्सा सुनाते हैं ...? बंद कमरो में रौनक लगाते हैं। जिन्दगी का कोई किस्सा सुनाते हैं ...? बंद कमरो में रौनक लगाते हैं।
उम्मीद अभी जिंदा है आगे उम्र अभी बाकी है अभी क्यों उठना, सहर की नींद अभी बाकी है।। उम्मीद अभी जिंदा है आगे उम्र अभी बाकी है अभी क्यों उठना, सहर की नींद अभी बाकी...
भाषाओं का ज्ञान, देश विदेश में पहचान। भाषाओं का ज्ञान, देश विदेश में पहचान।
दुनिया का सबसे बड़ा त्यौहार है आया, प्रत्येक देश में मनाए जाने वाला त्यौहार है आया, दुनिया का सबसे बड़ा त्यौहार है आया, प्रत्येक देश में मनाए जाने वाला त्यौहार ...
जान की बाजी लगाकर , हमें तो मंजिल को पाना है I जान की बाजी लगाकर , हमें तो मंजिल को पाना है I
हालात से मजबूर हूँ पर मैं मजबूत हूँ क्योंकि मैं एक माँ हूँ। हालात से मजबूर हूँ पर मैं मजबूत हूँ क्योंकि मैं एक माँ हूँ।
ठोकरें खाकर भी कई कई बार मैं सम्भली। ठोकरें खाकर भी कई कई बार मैं सम्भली।
कोरोना से ऐसे ही ना डरें हम कि ऐसे डरने से कोरोना नहीं जाएगा । कोरोना से ऐसे ही ना डरें हम कि ऐसे डरने से कोरोना नहीं जाएगा ।
जिंदगी है खूबसूरत, जीने का अंदाज चाहिए जिंदगी है खूबसूरत, जीने का अंदाज चाहिए
दुख होता है सदमा लगता है फिर तलाशते हैं किसी और को। दुख होता है सदमा लगता है फिर तलाशते हैं किसी और को।
जो समाज की खुशहाली में सौहार्द संचार करें। वो ही सच्ची श्रद्धांजलि वीरों की कर पाते हैं। जो समाज की खुशहाली में सौहार्द संचार करें। वो ही सच्ची श्रद्धांजलि वीरों की क...
आज सुनसान हैं गलियाँ, गलती यह इंसानों की। आज सुनसान हैं गलियाँ, गलती यह इंसानों की।
किसी एक के नहीं सभी के हाथों से छला गया हूंँ। किसी एक के नहीं सभी के हाथों से छला गया हूंँ।
और जज्बातों की कलम से लिखी जाती है। और जज्बातों की कलम से लिखी जाती है।
इस शहर में तुम आना संभल के। क्योंकि यहां की टूटी फूटी सड़कें। इस शहर में तुम आना संभल के। क्योंकि यहां की टूटी फूटी सड़कें।
किया नहीं जो कभी काम ,वह करूंगा अब किया इरादा यही ,मैं नहीं डरूंगा अब । किया नहीं जो कभी काम ,वह करूंगा अब किया इरादा यही ,मैं नहीं डरूंगा अब ।
गलती को स्वीकार करने व क्षमा मांगने से होता झगड़ा खत्म होने का काम, गलती को स्वीकार करने व क्षमा मांगने से होता झगड़ा खत्म होने का काम,