एक महामारी हमें हिला नहीं सकती
एक महामारी हमें हिला नहीं सकती
आज बाजार बंद और सड़के सुनसान है
क्योकि घरों में पापा और बच्चे एक साथ है
जो सोने वक्त ही घर पर आते थे
आज वो सुबह से मेरे साथ है
अब हाथ में फोन नहीं टीवी का रिमोट है
घर सब खुशी से मशरुफ है
अब घड़ी की सुईया थम गई है
अपनो से मिलने की यही घड़ी है
कोरोना बिमारी नहीं
खुदा की रहमत लगती है
मुझे अपनों के पास रखने की
उसकी साजिश लगती है
धरती और आकाश दोनों मुस्कराए आज
हवाओं में गूंजी थी एक आवाज आज
वो ध्वनी हमारी एकता की थी क्योकि
पूरे भारत का दिल धड़का था आज एक साथ।
