STORYMIRROR

Jinal Patel

Abstract

3  

Jinal Patel

Abstract

एक दिन यूँ ही

एक दिन यूँ ही

1 min
224

एक दिन यूँ ही 

छोड़ के चले जाना है 

क्यों तू फिक्र करता है 

क्या है तेरा इस दुनिया में।


जब ईंट से बनी हुए

घर भी मिट्टी में मिल जायेंगे।

तो तू तो इंसान है एक दिन

यूँ ही राख बन जाएगी।


यूँ ही छोड़ के चले जाना है

क्यों तू फिक्र करता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract