एक दिन जब घर मैं नहीं था पानी
एक दिन जब घर मैं नहीं था पानी
एक दिन जब घर मैं नहीं था पानी
सबको फिर याद आई नानी
घर मैं सिर्फ एक घड़ा था
वह भी आधा भरा पड़ा था
मुँह धोते या पानी पीते
घर मैं पड़े सबर्तन रीते
हमने आज नहाया नहीं है
माँ ने कुछ भी पकाया नहीं है
जूठे बर्तन औंधे पड़े हैं
माँ पापा चिंता मैं खड़े हैं
आस पास भी नहीं है पानी
यह है बहुत बड़ी परेशानी
याद आ रहा माँ का ताना
बंद करो नल मत गाओ गाना
बूँद बूँद जो नहीं बचाओगे
तो तुम भविष्य मैं पछताओगे
पानी का तुम जानो मोल
यह चीज है बहुत अनमोल
ईश्वर के यह हैं वरदान
जल वायु भूमि अग्नि आकाश महान
पंचतत्व का करो सम्मान
फिर बनेगी पृथ्वी महान
वृक्ष मछली मानव खेत
बिन पानी सब है रेत
घूँट घूँट भर पानी है पीते
पूरा दिन बीता है ऐसे
सोचो यदि पानी न होगा
तो फिर जीवन कैसे होगा
आज हम लें यह संकल्प
और बनाये अपना कल
जल थल नभ को बचाना है
यही तो हमारा खजाना है
बूँद बूँद से गागर है भरत
बूँद बूँद से सागर है भरता
बूँद बूँद हम तुम बचाएं
आओ जल संरक्षण बचाएं।
