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Jyoti deepak Suryawanshi

Abstract

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Jyoti deepak Suryawanshi

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एहसास

एहसास

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एहसास हुआ मुझे कि

कोई अपना नहीं होता


जब दर्द और ठोकरें

खा रहा इन्सान होता


मुसीबत में काम आये कोई

वो लाखों में एक होता


वरना अपना भी कोई

संकट में पराया हो जाता।


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