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Ankita Mohanty

Abstract Romance


4  

Ankita Mohanty

Abstract Romance


ए लड़की तू बदलने लगी

ए लड़की तू बदलने लगी

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कभी हुआ करती थी जो अपने घर के शैतान, 

वह तुम्हारे शैतानियों पे तुम्हें समझाने लगी। 

कभी जो सीधे मुहं किसीसे बात नहीं करती, 

वह तुम्हारे  साथ बात करने को तरसने लगी। 

ये लड़की तु बदलने लगी।


 कभी आईना ना देखनेवाली लड़की, 

 आज तुम्हारे लिए घंटों सवरने लगी। 

 कभी देर देर तक सोनेवाली लड़की, 

 आज तुम्हे जगाने के लिए सवेरे सवेरे उठने लगी। 

ये लड़की तु बदलने  लगी।


 कभी जो ज्यादा बात करती नहीं थी, 

 वह आज तुमसे घंटों बतियाने लगी। 

 कभी जो उखड़ा उखड़ा सा रहती, 

 वह आज बिन बात के मुस्कुराने लगी। 

 ये लड़की तु बदलने लगी॥


 कभी मंदिर ना जानेवाली लड़की, 

 आज तुम्हारे लिए ब्रत रखने लगी। 

 कभी जिन्स पहननेवाली लड़की , 

 आज तुम्हारे लिए सारी पहनने लगी। 

ये लड़की तु बदलने लगी।


 कभी जो मोहब्बत से नफरत किया करती थी, 

 वह आज तुमसे बेपनाह मोहब्बत करने लगी। 

 कभी जो अपने सपनों की राजकुमारी थी, 

 वह आज तुम्हारे रानी बनने का सपना देखने  लगी।  

 ये लड़की तु बदलने लगी।

 ये लड़की तु बदलने लगी।


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