दुनिया लाजवाब हैं
दुनिया लाजवाब हैं
चांद भी क्या खूब लगता है
जब चमकता प्रतीत होता है
अमावस्या पर बदल देता है रंग
पूर्णिमा पर फिर लाजवाब दिखता है
सूर्य स्वयं पीला नजर आता है
उसका रंग कभी लाल हो जाता है
बहुत बुरा लगता है ग्रीष्म में
सर्दी में फिर लाजवाब लगता है
हर एक तारा चमकता रहता है
टूटता तारा हर ख्वाहिश पूरी करता है
दिन में सुना हो जाता है आसमान
रात को फिर लाजवाब लगता है
हर नया पता हरा आता है
पतझड़ में पीला पड़ जाता है
सूखकर गिर जाता है बाद में
गिरता हुआ भी लाजवाब लगता है
जन्म के उपरांत नाम मिल जाता है
कोई मेहनत कर और कमा लेता है
कोई गिर जाता है किसी के प्यार में
वही शख्स दुनिया को लाजवाब लगता है।
