धरती माँ कहती हैं।....
धरती माँ कहती हैं।....
धरती माँ कहती हैं,
बस बच्चों, बहुत हो गई,
मुझे भी ज़रा सँवरने दो।.....
हरियाली इस संसार की, ख़त्म हो गई हैं,
पेड़, पौधों के जान भी, बची खुची रह गई हैं।
देखो बच्चों, बहुत हो गई,
मुझे भी ज़रा सँवरने दो।.....
धूल, मिट्टी, प्रदूषण बहुत हो गई हैं,
स्वस्थ हवा तो बस, ख़त्म हो गई हैं।
देखो बच्चों, अब बहुत हो गई,
मुझे भी ज़रा सँवरने दो।.....
जल की घारा पहले जैसे मीठी ना रही,
लोगों के वाणी पहले जैसे बोली ना रही।
बढ़ती आबादी ने बस, तबाह कर दी संसार को,
देखो बच्चों, अब बहुत हो गई,
मुझे भी ज़रा सँवरने दो।.....
अब बच्चों कुछ ही दिनों की बात हैं,
तुम भी थोड़ा आराम करो।
मुझे फिर से सजने-सँवरने में,
तुम भी थोड़ा सा वक़्त दो।.....
फिर लौटूँगी एक सुंदर दुनिया लेकर,
खुश हो मेरा मन, स्वस्थ जीवन देकर।
देखो बच्चों, यही है प्रकृति का सीख,
अब तुम सबल जाओ, यही है जीवन का रीत।
धरती माँ कहती है,
बस बच्चों, बहुत हो गई,
मुझे भी ज़रा सँवरने दो।.....
