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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Abstract Inspirational

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Abstract Inspirational

बचत

बचत

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रोज चाहे सौ रुपया कमाओ, मगर

उसमें से कुछ न कुछ जरूर बचाओ 

सुखी जीवन का ये पहला मूल मंत्र है 

जिसने भी इस मंत्र को अपनाया 

सफल उसका ये जीवन तंत्र है । 

बुरे वक्त में जब कोई साथ नहीं देता है 

मदद के लिए अपना हाथ नहीं देता है 

तब यही बचत भगवान बन जाती है 

मुश्किल समय में सिर्फ यही बचाती है 

जैसे पंछी तिनका तिनका जोड़ता है 

जमा किये गये तिनकों से घोंसला बनाता है 

उसी तरह आदमी भी पाई पाई बचाता है 

उस बचत से सुनहरा भविष्य बनाता है । 


धन दौलत से भी ज्यादा समय कीमती है

इसे व्यर्थ गंवाने वालों की बिगड़ती जिंदगी है 

जिसने भी समय की महत्ता समझी है 

जीवन में बस उसी ने तरक्की की है 

जिसने समय और धन दोनों बचाया 

उसने अपना मुकद्दर खुद है बनाया । 

बचत तो बिजली पानी की भी करनी है 

जिंदगी अगली पीढ़ी की सुरक्षित करनी है 

अगर पर्यावरण नहीं बचाया तो क्या बचाया 

कोरोना में हम सब देख चुके हैं इसकी माया 

झूठन छोड़कर अन्न खराब नहीं करना है 

एक एक दाने का महत्व हमें समझना है 

शब्दों में भी कृपणता अच्छी होती है 

कम बोलने वालों की दुनिया बड़ी खूबसूरत होती है 

"कम खाओ गम खाओ" का सिद्धांत बहुत प्यारा है 

ना जाने कितनों का जीवन इसने संवारा है 

जीवन में बचत बहुत जरूरी है 

इससे बनता जीवन सिंदूरी है । 



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