बचपन
बचपन
जिन्दगी की किताब से न जाने कब
बचपन के पन्ने पलट गए ।
जिस किताब के पन्ने में छिपी थी
खुशियां अपार
जहाँ दादी-नानी का था दुलार
जहाँ हुआ करती थी गलतियां हजार
जहाँ सवेरा दादी की गोद में होता
वही रात उनकी कहानियों से।
वो दिन भर की मस्तियों
वो दोस्तों के साथ आम के पेड़ पर चढ़ना
बचपन के वो खेल वो नादानियाँ, वो प्यार यो गलतियाँ, वो लगाव,
वो डॉट खाने के डर से छादी की गोद में छिप जाना ।
आज भी जिन्दा है दिलो में वो पल
जिसे जीना चाहूँ मैं हर पल।..
