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जहाँ दादी-नानी का था दुलार जहाँ हुआ करती थी गलतियां हजार जहाँ दादी-नानी का था दुलार जहाँ हुआ करती थी गलतियां हजार
सूर्य जैसा चमकने के लिए तू सूर्य जैसा तप सूर्य जैसा चमकने के लिए तू सूर्य जैसा तप
हार चुकी हूँ जिंदगी से फिर भी जीने को तैयार हूँ मैं। हार चुकी हूँ जिंदगी से फिर भी जीने को तैयार हूँ मैं।
आसमां को छूने की चाहत रख, सूर्य जैसा चमकने के लिए तू सूर्य जैसा तप आसमां को छूने की चाहत रख, सूर्य जैसा चमकने के लिए तू सूर्य जैसा तप