STORYMIRROR

Kiran kiran

Inspirational

3  

Kiran kiran

Inspirational

औरतें

औरतें

1 min
467


बंद किवाड़ों से झाकंती कुछ 

गहरी अखियां 

तोड़ कर भीतर की चुप्पी 

लबों पर 

लाती कुछ शब्द अनकहे से 

सुनो हम जे कहते हैं , पर ...

अखियाँ फिर बह गयीं 

एक चुप्पी मे 

कैद होकर ।

भीतर का अवसादग्रस्त मन अब 

अकुलाहट करने लगा हैं ,

खोल डालो द्वार मन के ,

उतार दो न

पुरूष भय के लिबास ,

आओ आज कुछ कहें मन की ।

सुने तन की ,

लगाएं जरा कजरा बन जाए 

बाबा की मुनियां।

आओ आज चौबारों पर आए 

खटिया बिछाएँ

 बैठ कर एक लम्बी घुटन की यात्रा को 

तौड दें और जीएं 

कुछ मुसकराहट के साथ ।

बहुत डर है भीतर एक औरत का औरत से ?

और पुरुषों के पौरुष का 

उतारों भी लिबास अब 

चार दिन की जिंदगी आओ 

गलबहियां डाले न ।

औरतों और कोशिश करें और बाहर 

आए जीवन 

के लिए मेरे साथ !



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Kiran kiran

औरतें

औरतें

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Inspirational