STORYMIRROR

Pinkesh Joshi

Inspirational

4  

Pinkesh Joshi

Inspirational

अभी बाकी हैं !

अभी बाकी हैं !

1 min
408

रुक जा ज़रा थोड़ी इबादत अभी बाकी हैं

माना दिल का मोहल्ला सुना पड़ा हैं

पर गैलियों की गुनगुनाहट अभी बाकी हैं 


यूँ सपनों के टूट ने की आवाज़ों में

दब गई सब ग़ज़लें हैं

पर उम्मीदों की धुन अभी बाकी हैं


माना घोर उदासियों के बादल छाए हुए हैं

आकांक्षाओं के आकाश में

पर खुशियों की बारिश अभी बाकी है


यूँ हतोत्साही ना हो तू बन्दे

तेरा प्रारब्ध अभी बाकी हैं रुक जा ज़रा

थोड़ी इबादत अभी बाकी है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational