STORYMIRROR

Ladly priya

Abstract

3  

Ladly priya

Abstract

आंसु आँखों में छुपाती हूँ

आंसु आँखों में छुपाती हूँ

1 min
222

मुझे रूठें हुए अपनों को मानना नहीं आता

आंसु आँखों मे छुपाती हूं दिखाना नहीं आता

लोगों से हंस कर मिलती हूँ आजकल मैं

सबको दिल का दर्द जताना नहीं आता

किसी के जाने के बाद और

किसी से दिल का बात बताना नहीं आता

वेपरवाह सी हो गयी हूँ मैं कुछ दिनों में

इस पत्थर को अब पिघलना नहीं आता

अपनों की परवाह मे मै पिघल जाती हूँ

सबको देख कर झूठी हंसी हंस जाती हूँ

आज भी उन्ही का ख्याल है मेरे दिल मे

लेकिन उन्ही को भूल कर जीना मुझे नहीं आता

उनके जाने के इतने दिन बाद भी

उन्हे अपने से दूर करना मुझे नहीं आता

आंसू आँखों मे छुपाती हूँ दिखाना नहीं आता !!!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract