End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!
End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!

Mona Patel

Abstract


4.7  

Mona Patel

Abstract


आंखें खोल बोल सीधी बात

आंखें खोल बोल सीधी बात

1 min 185 1 min 185

सीधा चश्मा पहन के,

बीना शोर शराबे के,


ऐक एक की पोल खोलता हूं,

मैं टेढ़ी नहीं सीधी बात करता हूं,


सोच के समाज के हर बात में बोलता हूं,

अफाओ के दौर में मैं,

सीधी बात करता हूँ,


हाथों में कलम हैं, हथियार नहीं,

लिखने की ताकत है,

जो घाव भी देता है,


मलहम भी लगता है,

सच बोलने की साझा भी पाता है,

लेकिन मैं सीधी बात ही करता हूं।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Mona Patel

Similar hindi poem from Abstract