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Shilpi Signodia

Abstract

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Shilpi Signodia

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आज नारी दिवस पर मौन धारण करती

आज नारी दिवस पर मौन धारण करती

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तुम्हे शिकायत है ना,

मैं सारा दिन बेवजह शोर करती हूँ,

आज नारी दिवस पर मौन धारण करती हूँ,

इक दिन का सुख चैन तुमको उधार देती हूँ।


अरे सुनो ! देखो मेरी सफेद

शर्ट का क्या हाल हुआ है,

काम वाली ने इसका काम तमाम किया है,

तुम इसे कुछ कहती क्यूँ नहीं ?


अरे स्कूल का टाइम हो चला,

और बंटी अब तक सो रहा,

तुम कुछ कहती क्यूँ नहीं।

नीचे बस का हारन बज रहा

और तू अब तक क्या कर रहा,

अरे तुम कुछ कहती क्यूँ नहीं।


मेरी टाई कहाँ, वालेट कहाँ है,

ज़रा दे दो प्रिये, और इस मौन को तोड़ दो,

अपनी मीठे बोल मेरे कानों मे घोल दो।

मै मुस्काई, इतना भी क्या जल्दी है,

अभी तो पूरा दिन पड़ा है,

तुम्हारा सुख चैन अजीज है मुझे भी।


बंटी की पढ़ाई, पिंकू की खिलाई,

अरे ये तो सुनते ही नहीं,

और तुम मौन बैठी हो।


समझ गया मैं, तुम्हारा शोर मचाना,

यूँ पुकारना, सुरक्षा कवच है हमारा।

ये तो हम है जो सुनते नहीं है,

वरना तुम कहाँ कुछ कहती हो।


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