आ, कहीं दूर निकल चले
आ, कहीं दूर निकल चले
आ, कहीं दूर निकल चले,
इस भीड़ भरे सन्नाटे से
लोगों के होने के एहसास से,
खुद को समझने के प्रयास में
आ, कहीं दूर निकल चले ।
निराश मत हो फल से
मेहनत कर पूरी लगन से,
खुद में उलझा ये मन है
कुछ समय खुद को दे,
खुद को सुलझाने के लिए
आ, कहीं दूर निकल चले |
जब शांत मन हो तेरा
तू ध्येय अपना सटीक बना,
ध्येय अपना ढूंढ कर
अपना जीवन उसमें लगा,
लक्ष्य अपना जानने को
आ, कहीं दूर निकल चले ।
उड़ ऊपर इतना कि
आंधी छू ना सके,
बेड़ियों को तोड़ कर
पंख फेला तू घने,
ऊपर उड़ने के लिए
आ, कहीं दूर निकल चले |
ये नाव कभी डगमगाएगी
लौ तेरी बुझना चाहेगी,
पतवार की रफ़्तार बड़ा
तूफानों को चीर किनारों पर जा लगा,
नाव चलाना सीखने को
आ, कहीं दूर निकल चले |
खुद के लिए तुझे
खुद से लड़ना होगा,
बेड़ियाँ तोड़ने के लिए
मजबूत बनना होगा,
जिंदगी को समझने को
आ, कहीं दूर निकल चले |
