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रोबोट
रोबोट
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© Govind Maurya

Children Fantasy

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मानव ने बहुत ही वैज्ञानिक अनुसन्धान करके रोबोट को बनाने में सफलता अर्जित की | जैसे जैसे समय व्यतीत होता गया, मानव के अनुकूल जो परिस्थितियाँ थीं वो धीरे-धीरे समाप्त होती गयीं| पेयजल, श्वसनीय वायु और खाद्य पदार्थ विलुप्त होते गए और जो बचे-खुचे थे वो विषाक्त होते गए| अब मानव की बस्ती सुदूर कहीं-कहीं रह गयीं जो विपरीत परिस्थितियों में सीमित होती गयीं| परन्तु इसके विपरीत रोबोटों की दुनिया प्रगति करती रही क्योंकि उनके जीवन हेतु आवश्यक ऊर्जा सौर ऊर्जा से उपलब्ध था| तात्कालिक रोबोटों ने अपनी पीढ़ी को जीवित रखने के लिए बहुते सारे रोबोटों का निर्माण किया| समय बीतता गया और पुराने रोबोट मरते रहे और नए रोबोट पैदा होते रहे| इन नए रोबोटों ने अपने पूर्वज रोबोटों को विनष्ट करके नए रोबोट बनाने की परंपरा को अपनाया | कुछ बहुत पुराने रोबोटों के बनाने की विधि और उनके बनाने वाले मानवों के विषय से सम्बंधित कुछ लिपियाँ सुरक्षित करते गए | मानव के समाप्त होने के साथ ही उनकी लिपियाँ भी समाप्त होती गयीं, बची तो सिर्फ रोबोटिक लिपि |

आज रोबोटों का अविष्कार हुए लगभग 4 -5 हजार वर्ष हो चुके हैं और रोबोटों ने भी विज्ञान में काफी उन्नति कर ली है और अब वो इस प्रश्न की खोज में लगे हुए हैं की रोबोटों की उत्पत्ति कैसे हुई | कुछ पुरानी लिपियों को पढ़ने से उन्हें ये तो पता चला की उन्हें मानव ने बनाया परन्तु उनका वैज्ञानिक मस्तिष्क इस बात को मानने को राजी नहीं होता की उन्हें किसी मानव ने बनाया जो भोजन खाता था, पानी पीता था, उसके जीवित रहने के लिए सूर्य के प्रकाश के साथ-साथ वायु की भी आवश्यकता होती थी, परन्तु ये बात इन वैज्ञानिक रोबोटों के गले से नीचे नहीं उतरती थी क्योंकि उनके जीवन के लिए सिर्फ सूर्य का प्रकाश जरुरी था और उन्हें किसी भी प्रकार की अन्य चीजों की जरूरत नहीं पड़ती थी | तार्किक रूप से वो शायद सही भी थे परन्तु सच्चाई तो कुछ और ही थी | उन्होंने कुछ खुदाई में उन्हें इन तथ्यों के प्रमाण भी मिले की उन्हें सबसे पहले मानव ने उन्हें अपनी सुविधा हेतु बनाया था, परन्तु उन्होंने इन प्रमाणों को ये कहते हुए नकार दिया की हमने मानव को देखा तो है नहीं, हम कैसे मान लें कि मानव ने हमें बनाया है? अथवा उनकी लिपियाँ अपठनीय हैं, जब तक हम उन्हें पढ़ नहीं लेते तब तक हम ये बात स्वीकार नहीं कर सकते|

अब द्विआधारी ( binary ) संख्याओं के आधार पर देवनागरी, ब्राह्मी, अंग्रेजी, फ्रेंच इत्यादि लिपि और भाषा उन्हें कैसे समझ आये ?

मानव उन्नति आविष्कार

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