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एक आदमी
एक आदमी
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© Dr. Dharmendra Mulherkar

Inspirational

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एक आदमी सारा शहर बदल देता है

वो जब आता है

तो एक अंजान सा ख़ौफ़

उन की नींद उड़ा देता है

उसका नाम सुनते ही

माहौल बदल जाता है

मेरे यार

एक आदमी सारा शहर बदल देता है

बरसों से पड़ी थी

वो धूल हटने लगी है

कई सारी फाईलें 

अब छटने लगी है

सफाई की गंगा अब बहने लगी है

पता नहीं क्या जादू है 

उस नाम में

तैरने लगी पानी पे

काम की गाथा है

एक आदमी सारा शहर बदल देता है

बंबाजी का पसीना अब छूटने लगा है

वो न खाता है न सोता है

वो भगवान को भी पानी में डाल देता है

न जाने क्यों

उसका नाम बड़ों बड़ों की 

रुह कंपा देता है

एक आदमी सारा शहर बदल देता है

कितनी बार सुना था वो डायलॉग 

जो डर गया वो मर गया

लगता था वो जमाना खत्म हो गया

शोले का गब्बर बस नाम हो गया

नहीं यार 

'गब्बर 'अब भी जिंदा है

वो शहर में अब भी आता है

वो शहरों में दहाड़ता भी है

एक आदमी सारा शहर बदल देता है।

 

शहर खौफ़ माहौल

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