मीरा
मीरा
कंकड जो तोड़े,
मन-रुपी घागरीया...
फोड़े मटका मीरा का,
असे राधा का बावरीया...
बंसी जो बजे,
धुन सखीनू बुलाए...
मीरा दौड़त आए,
सुर राधा-राधा बोलत जाए...
सखियाँ देती ताने,
कोयला भी ना तू मीरा ...
जिसके आभूषण है दस,
उस पे राधा जैसी हीरा ...
सभी को समझाते,
मीरा कहे विचार साधा...
हो मुखी नाम मीरा कैसे ?
जो मनी ठाए राधा...!!!
