हौंटेड हाउस
हौंटेड हाउस
रोह्न् को पाहाङ चढने का बडा शौक़ था । वो बचपन से कहीं भी जाते बक्त पाहाङ देखले तो खुदको रोक नहीं पाता था । थोडा बहत चढकर ही आता था वो । सायद उपरबाला की रेहेम्, इसलिए रोहन् को पाहाङ चढना सिखानेबाला मिलगया । उसकी पडोस् में रेहते थे वो । रणबीर् नाम है उनका । बहत् अच्छे ट्रेन्ड करते हैं ।
रोजाना की तरहा प्राटिस् करने केलिए आज भी रोहन् और उसके साथ उसकी दोस्त निकल पडे पास में एक जगंल के तरफ । गावँ से करीब् ४५ किलो मीटर दूरी पर एक पाहाङ है । तीन लडके और दो लडकी और उनकी कोच् रणबीर् सार् साथ मिलकर आये । करीब् ११ बजे पहुंचगये थे उस पाहाङ के पास । चढने की तैयारी में आधा घन्टा बीतगया । फिर सब थोडा थोडा करके चढते रहे । यैसे ही २० फिट चढने पर वो लोग थक जाते हैं । वहीं पर थोडा आराम किये । तब टाइम् ये कोई २ या २.३० होगा । फिर उसके बाद चढना शुरू किये । वहां से लगता था करीब ओर १५ फिट है । चढने का नशा ऐसे सबार था कि अन्धेरा होनेबाला है ये याद तक नहीं था । वो सब ५.३० तक उपर पहुंचगये थे । वही रात में ठहरने की तेयारी भी करके गये थे वो लोग । पर ये क्या पाहाङ के ऊपर घर ! यहां कोन रहता होगा ? पर जो भी हो उसे अब टेन्ड बनाना नहीं पडेगा इस बात की खुशी थी । वो लोग सोच रहे थे घरके मालिक को आज रात ठहरने की इजाजत मागेंगें । ठंड का दिन था, इसलिए रात बहत जल्द हो जाता था । उस बक्त भी रात होगेया था । साफ् कुछ नजर नहीं आता था । फिर भी वो लोग टर्च मारकर आसपास देखने लगे । घरको ध्यानसे देखे तो बहत अजीब था । आसपास इनसान की हडीयां और कबरस्तान् है । यैसे " एक प्रेत बाधित पाहाङी पर घर " कोन बनायेगा ? घर भी दीखने साधारण नहीं था, " असाधारण " दीखता था ।
वो लोग थोडा डरगये थे इस जगह को देखकर । पर फिर भी हिम्मत जुटाकर घरके अन्दर जाने केलिए जब दरबाजा पर हाथ रखे तो दरबाजा अपने आप खुलगया । सभी डरते थे पर रणबीर सर् ने सबको हिम्मत देते रहे । अब वो लोग घरके अन्दर बढे । थोडा आखं घुमाकर देखे तो बहत " डराबना " था । अब अपने आप ही दरबाजा बन्द हो गया । रणबीर सर् दरबाजा के पास दौड़े । हर तरफ की कोशिश किये दरबाजा खुलने को, पर नहीं खुला । फिर अचानक कहीं से हाथ मारने पर दरबाजा खुलगया । सब खुश हुये । उनके मन से डर थोडा कम हुआ । वो लोग बैग रखकर वहीं पडा हुआ सोफे पर बैठ गये । थोडा अच्छे से सांस लिये ।
वैसे ही बैठे बैठे सब सो गये । करीब १० बजा होगा । किसी ने रोहन् को नींद से जगाया । वो नींद से उठा अचानक इसलिए कुछ साफ नजर नहीं आता था उसे । फिर आखं मलकर देखा तो बहत खुबसुरत लड़की उसके सामने खडी थी । बडी धीरे से बोल रही आरे सबको उठाओ खाना खायेगें । रोहन् पुछा तुम कोन हो ? लड़की हंसके जबाब देती है, ये घर मेरी है । तुम लोग यहां घुसके सोगेये थे । इसलिए जगाया नहीं । अब रात होगेयी है, सब लोग उठजाओ । रोहन् और उस लड़की ने मिलकर सबको उठाये । अब लड़की वहां से चली जा रही थी तो रणबीर सर् पूछे.......आप अकेले रेहते हैं ? लड़की बोली क्युं ? अकेली रेहने में कोन सी बुराई है ? कम से कम चपर-चपर से मुक्ती तो मिलेगी । रणबीर् सर् बोलते हैं नहीं साथ रहने से अच्छा लगता है । लगता है तुम किसी के साथ रेहना पसन्द नहीं करती हो । लड़की कुछ जवाब ना देकर वहां से चली जाती है । फिर रुक् के बोलती है वहां टेबल पर खाना रखा है, सब लोग खा लेना । और हाँ कोई भी चीज को हाथ मत लगाना, ना ही इधर उधर कहीं घूमना । तुम सबके ऊपर मेरी नजर है । इतनी बोलकर चली जाती है । तभी उसकी ग्रुप् का एक लड़की बोलती है, बडी अजीब लड़की है । हमको खुद खाना बनाकर देती है और घरमें भी रेहने देती है । और तो और हमपे नजर भी रखी हुई है, कमाल है सर् । फिर एक लड़का बोलता है, हाँ जो भी हो उससे हमे क्या ? सुबह होते ही हम यहां से चले जायेगें । और एक लेडका बोलती है, हमे तो भाई कुछ गडबड लग रही है । रोहन् बोलता है, आबे तु डर मत । वो कोई भुत नहीं है, जो तुझे खा जायेगा । आज रात की ही तो बात है । चलो आ जायो सब लोग खाते हैं । सब खाना खाने के बाद वहीं पर सोगये ।
थोडी देर बाद कहीं से रोने की आवाज आयी । सब उठके देखने केलिए गये तो कोई नहीं था । पर जब पीछे मुडे तो वो लड़की थी । लड़की पुछी "क्या हुआ ? तुम लोग अभी तक सोये नहीं ? और मेरी कमरे की बाहार क्या कर रहे हो ? तुम्हे मना किया था ना इधर उधर घुमने के लिए । जाओ जा के सो जाओ ।" सब चले जा रहे थे, एक लड़की पुछी तुम तो अन्दर गये थे, हम सब बाहर थे......तो तुम बाहर कैसे ? लड़की बोली...ये मेरा घर है । जाहां चाहुं, जब चाहुँ जा सकती हुं । तभी रणबीर् सर् सबको लेकर वहां से नीचे जा रहे थे तो उसी लड़की ने मुड़ के देखा तो वो लड़की का " चेहरा बहत डरावना " था । वो चिल्लायी, फिर उसका सपना टूट गया । चारो तरफ देखा तो वो कोई घर नहीं था । लाशों के ढेर के बीच वो लोग सोये थे । फिर वो लड़की सबको उठायी!
सब लोग नींदसे उठके देखे तो चौंक गये । बहत डर गये सारे । और फिर बहत अजीब और " डराबने दृश्य " देखने लगे । किसी ने कहा में ऐसी जगह किताबो में " डरावनी कहानी " में पढी थी आज आखों से देख रही हूँ । और इसके बाद शायद कोई जिंदा नहीं रहेगा कुछ देखने केलिए । रोहन् बोला चुप् कर,ऐसा कुछ नहीं होता । चलो यहां से चलते हैं । फिर सब लोग जा रहे थे की पहले जानेबाला लड़का कहीं घुम हो गया । सबने उसको ढूंढते रहे पर वो मिला नहीं । ऐसे ही एक एक करके सब गायब् हो गये । अब बचे हैं सिर्फ रणबीर् सर् और रोहन् । बहत डरगये थे दोनो । पर चलना नहीं छोडते थे । ऐसे ही चलते चलते उस इलाके से निकल गये वो दोनो । बच गये वो लोग पर अपने साथी को खो दिये । यहां से निकल के जगंल में बैठे थे । सुबह हो गई । पास में एक रूषी को देखे तो रात के घटना के बारे में बताये तो बाबा बताये वो एक भूत कोठी है । कुछ राज भी बताये । फिर वो दोनो घर चलेगये । उसके बाद सुना गया की वहां से कुछ आबाजे आती हैं बचाओ बचाओ, पर कोई मिलता नहीं ।
