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संस्कार प्रकृति का रूप संवरता है दौलत धूप-छांव सी कुदरत धनवान निर्धन है कोई वायरस सूक्ष्म जीव कोविड तबाह प्रकाश धरती परमाणु पिंड ग्रह नक्षत्र आफत आकाश जानवर हिंदी कविता उपरोक्त

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