तो इन्हें सँवारने से पहले क्यों न खुदको सँवारे हम। तो इन्हें सँवारने से पहले क्यों न खुदको सँवारे हम।
पापी-खाली पेट तो मान रहा न, कैसे इच्छापूर्ति करेगा रंक पापी-खाली पेट तो मान रहा न, कैसे इच्छापूर्ति करेगा रंक
का लो नारी का सम्मान, मुझसे ही है, तुम्हारा मान मुझ में भी है प्राण, मुझमे भी है जान।। का लो नारी का सम्मान, मुझसे ही है, तुम्हारा मान मुझ में भी है प्राण, मुझमे भी...
कानों में स्वर तुम्हारा ही गूँजे, नैनों से तुमको ही देखा करूँ कानों में स्वर तुम्हारा ही गूँजे, नैनों से तुमको ही देखा करूँ
इंसान और कुछ नहीं बल्कि दया है अवसर के लिए इसे याद मत करो । इंसान और कुछ नहीं बल्कि दया है अवसर के लिए इसे याद मत करो ।
एक पूरा वीरान संसार है, जो खड़ा है हमारे सामने एक प्रश्नवाचक कि तरह , जिसे हम ख़ूबसूरती के... एक पूरा वीरान संसार है, जो खड़ा है हमारे सामने एक प्रश्नवाचक कि तरह , ...