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निगलना मंजिल इश्क नारी मूर्ती नहीं इंसान है जीवन सुकून करीब अपने अलग शब्दों के मोती थक जीती हूं अहसास खामोश राह hindi kavita डोर hindikavita हौंसला शोर

Hindi जीती Poems