STORYMIRROR

मौसम हूं छोड़ मैं तुम्हारा भार कैसे चुका पाऊँगा| पीना चुका है हे मातृभूमि उतर सोचने लगा जा चुका खूब सर्द विवाह है देश दिल तरल गुजर चुका रूह तक बिक गर्मी

Hindi चुका Poems