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हूं गर्मी तरल पदार्थ पानी गुजर चुका छोड़ सर्द मौसम खूब उतर दिल हे मातृभूमि बिक सोचने लगा जा चुका है देश मैं तुम्हारा भार कैसे चुका पाऊँगा| पीना विवाह

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