STORYMIRROR

Aviral Tiwari

Abstract

4  

Aviral Tiwari

Abstract

योद्धा

योद्धा

1 min
446

एक काश की तलाश में हूँ

शून्य से दूर आकाश में हूँ


परिकल्पनाओं के पास, यथार्थ से दूर

मै अलग हूँ, पर आप ही तो हूँ


लम्हों में टूटता, लम्हों में जुड़ता

एक ख्वाब, पर देखता तो हूँ


दिन की भीड़ में खोता हूँ मैं

शाम को खुद से मिलता तो हूँ


खफा किस बात से हूँ?

कुछ तकदीर है, कुछ बना पाता तो हूँ


ना शिकन है ना कोई मलाल

जितनी बाजी हारी हैं, उतनी जीता तो हूँ


इंसान हूँ ,कई मसले हैं

पर खुद के ऊपर देख पाता तो हूँ


अक्सर हाथ फैलाता हूँ मैं

ज़रूरत में किसी के काम आता तो हूँ


तसल्ली से समेट रखा है सुकून

अधजला सा ख्वाब लिए, खड़ा तो हूँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Aviral Tiwari

Similar hindi poem from Abstract