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Sakshi Pandey

Abstract

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Sakshi Pandey

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उस गली में जा तो सही

उस गली में जा तो सही

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एक दिन तू भी उस गली में जा तो सही,

ख़ामोश चेहरों की बेचैनी को पढ़ तो सही।


ना कर पाएगा गुरूर अपनी सक्सियत का ,

एक बार चक्कर शमसान का लगा तो सही।


हर बात वही आकर रुक जाएगी,

एक बार आइने का सामना कर के   

देख तो सही।


हाथों की लकीरों पर विश्वास कर,

मंजिलों को पाने कि गलतफहमियां,

मिट जाएगी ।


एक बार सीढ़ियां चढ़ कर देख तो सही। 


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