End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!
End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!

Saubhagya Agarwal

Inspirational


3.9  

Saubhagya Agarwal

Inspirational


उम्मीद का दीपक

उम्मीद का दीपक

1 min 164 1 min 164

यह कैसा अंधकार हर ओर अड़ा है

मानव जंजीरों में जकड़ा पड़ा है


भूल तो कुछ हुई होगी हमसे

जो हाट चौबारा सब सूना पड़ा है


दर्द ही दर्द तेरी सृष्टि के अंतस बसा है

अपना ही अपनो से दूर खड़ा है


सुना है ये हमने जब तिमिर घना हो

उजियारे की किरण लिए तू पास खड़ा है


ओ मेरे परमेश्वर बस सहारा तेरा है

मेरे उम्मीद के छोटे दीये में आसरा बड़ा है


खुशियों के बुझते हुए इन दीयों को 

मेरा वतन हथेलियों से थामे खड़ा है।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Saubhagya Agarwal

Similar hindi poem from Inspirational